Thursday, September 29, 2011

एक रंजिश है तुमसे..

..के अब कोई रंजिश भी नहीं 

एक सन्नाटा है 
जो छाके 
शोर छोड़ गया 
बस उस शोर में तुम नहीं 

एक आवाज़ है 
जो गुम हो गयी 
भीनी सी गूँज है 
बस उसमे तुम नहीं 

शोर तो गुल कर गया 
मेरे मन का 
पर मनके पे जो नाम तुम्हारा 
बस उस नाम में तुम नहीं 

एक कहानी है अपनी
ढूंढ रही जो तुम्हे  
तुम्हारा अफसाना 
बस वो खो चली 

यही रंजिश है मेरी.. के तुम हो ही नहीं

बस एक साँस चल रही है
जाने कब टूट जाये
पर जब तक चल रही है
कह रही है
के यह रंजिश है मेरी
 के अब कोई रंजिश भी नहीं

..

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